करो योग, रहो निरोग”, यही योग का मंत्र है

 

*राष्ट्रीय/ विजयवाड़ा, 21 जून, 2026:* परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के अखण्ड पुरुषार्थ व अथक प्रयासों से योग आज पूरे विश्व में प्रतिष्ठापित हो गया है। 21 जून को लगभग 200 देश एक साथ योगाभ्यास कर योग की स्वीकार्यता को चरितार्थ करते हैं। इस वर्ष 12वाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने कृष्णा नदी क्षेत्र, अमरावती (विजयवाड़ा), आंध्र प्रदेश से योगमय राष्ट्र व योगमय विश्व का आह्वान किया। यह कार्यक्रम पतंजलि योगपीठ तथा आंध्र प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया जिसमें श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का भी सान्निध्य रहा। इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) रही।
यूँ तो कार्यक्रम प्रात: 5 बजे से प्रारंभ हो गया था किंतु सरकारी कार्यक्रम के योग प्रोटोकॉल अनुसार स्वामी रामदेव जी महाराज, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन.चंद्रबाबू नायडू एवं आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने 45 मिनट की मानकीकृत योग दिनचर्या का अनुपालन करते हुए लगभग हजारों योग साधकों को योग का अभ्यास कराया। प्रारंभ में प्रार्थना, ग्रीवा, कंधा, कमर और घुटनों से सम्बंधित चालन क्रियाओं का अभ्यास कराया गया, तत्पश्चात खड़े होकर करने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन और त्रिकोणासन, बैठकर करने वाले आसनों में भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, शशकासन और उत्तान मंडूकासन, पेट के बल लेटकर करने वाले आसनो में मकरासन, भुजंगासन और शलभासन, पीठ के बल करने वाले आसनों में सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध हलासन और पवनमुक्तासन का अभ्यास कराया। अंत में प्राणायाम और ध्यान के लिए अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, और ध्यान व संकल्प का अभ्यास कराया गया।
इससे पूर्व स्वामी जी महाराज ने कहा कि अमरावती देवताओं की राजधानी है। आज यहाँ के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू गारू जी के दिशानिर्देशन व नेतृत्व में योग का यह अनुष्ठान सहजतापूर्वक सम्पन्न हो रहा है। स्वामी जी ने कहा कि श्री नायडू एक विजनरी मुख्यमंत्री हैं। उनमें दृढ़ता, सेवाभाव, समर्पण की भावना व अप्रतिम सृजनात्मक क्षमता विद्यमान है। वे केवल एक राज्य के मुख्यमंत्री ही नहीं अपितु इस सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इस अवसर पर उन्होंने पूरे विश्व को योग का संदेश देते हुए कहा कि “करो योग, रहो निरोग”। यही योग का मंत्र है।
इस अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि योग पूरे विश्व के लिए हमारे पूज्य ऋषियों का अवदान, योगदान, विरासत व विज्ञान है। योग सभी के लिए एक लाइफस्टाइल है। यह सैल्फ हीलिंग की प्रक्रिया है। योगियों के लिए योग साधना पद्धति, आमजन के लिए जीवन पद्धति व रोगियों के लिए सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है।
कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनका मिशन योग को राज्य के हर घर तक पहुंचाना है ताकि इसे एक जन आंदोलन बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव जी ने योग को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। वे केवल भारत ही नहीं, अपितु पूरी दुनिया के योगगुरु हैं। श्री नायडू ने कहा कि मैं पिछले 3 दशकों से तकनीक को बढ़ावा दे रहा हूँ तथा पूज्य स्वामी जी पिछले 30 वर्षों से योग को प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं। अब हमें तकनीक और अध्यात्मिकता को एक साथ लेकर चलना होगा। हमारा उद्देश्य आंध्र प्रदेश को केवल टेक्नोलॉजी हब बनाना ही नहीं अपितु स्प्रिच्युअल एवं वेलनेस हब बनाना भी है। यही वह नेतृत्व है जो केवल भारत दे सकता है।
कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि विजयवाड़ा पुण्यक्षेत्र है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की प्रात:काल की बेला में परम पूज्य स्वामी जी महाराज तथा आंध्र प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू योग का संदेश दे रहे हैं, योग के प्रचार-प्रसार के लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं है।
कार्यक्रम में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी द्वारा रचित पुस्तक “योगर्षियोगनिघण्टु:” का विमोचन भी किया गया। आचार्य जी ने “योगर्षियोगनिघण्टु:” पुस्तक के विषय में बताया कि इसमें 3753 योगासनों, 55 प्रकार के प्राणायाम, 721 बंध मुद्रा, 120 ध्यान विधि, 150 शोधन क्रिया तथा 400 यौगिक व्यायाम का उल्लेख किया गया है। पहली बार कुल मिलाकर 5199 योग क्रियाओं के नामों काे डाक्यूमेंटेशन किया गया है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक संस्कृत और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। यह योग की समग्र विरासत का संकलन है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री महोदय ने सभी साधकों को योग को अपनी जीवनचर्या में सम्मिलित करने हेतु संकल्प दिलाया तथा योगव्रती, आयुर्वेदव्रती, स्वदेशीव्रती, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश की सेवा के लिए संकल्पित किया। आंध्र प्रदेश के आयुष विभाग द्वारा जारी पुस्तक “आयुष आरोग्य सूत्रावली” का भी विमोचन किया गया जिसे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में सम्मान मिला है।
मोदी जी की प्रेरणा से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मिली मान्यता
स्वामी जी ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस संभव हो पाया। उनके प्रयासों से विश्व के 177 देशों ने एक प्रस्ताव लाकर योग दिवस की परिकल्पना को साकार रूप दिया। उन्होंने मोदी जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा व संकल्प से आज देश विकसित भारत, स्वस्थ, समृद्ध, परम वैभवशाली, जगतगुरु, विश्वगुरु भारत की ओर अग्रसर है।
पतंजलि शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने दिखाया योग का दम
पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम् व पतंजलि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने योग स्तूप (मलखम्भ योग), रज्जु योग के साथ-साथ सामान्य योग प्रक्रियाओं व एडवांस योग का श्रेष्ठतम प्रदर्शन किया। उन्होंने कठिन आसनों को सरलता से करते हुए योग के क्षेत्र में पतंजलि के योगदान को परिभाषित किया।
बच्चों के लिए योग
योगा फोर यूथ, योगा फोर स्टूडेंट एण्ड योगा फोर चिल्ड्रन का मंत्र दिया। स्वामी जी ने कहा कि विद्यार्थियों के सामने आज कई प्रकार के संकट, परेशानियाँ व चुनौतियाँ हैं। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को कम से कम एडवांस योग की 5 प्रक्रियाओं को अवश्य कराएँ।
विभिन्न साध्य-असाध्य रोगों के लिए बताए योगासन
स्वामी जी महाराज ने कहा कि योग सभी शारीरिक समस्याओं का समाधान है। योग प्रोटोकॉल के अतिरिक्त उन्होंने उष्ट्रासन, पूर्ण उष्ट्रासन, हलासन, मर्कटासन, सर्वांगासन, शीर्षासन, हलासन, चक्रासन, पूर्ण चक्रासन, पश्चिमोत्तानासन, फूनमनासनम, पद्मासन, उत्तथित पद्मासन, वज्रासन, मयूरासन, मण्डूकासन, दण्डासन, योग मुद्रासन, पूर्वासन, वक्रासन, अर्द्ध मत्सेंद्रासन, गोमुखासन, पवन मुक्तासन, उत्तानपादासन, सेतुबंधासन का भी अभ्यास कराया।
उन्होंने योग फॉर हेल्दी एजिंग, योग फोर लांजिविटी एण्ड योग फॉर इम्यूनिटी, योग फॉर लाइफ स्टाइल डिजीज, वात-पित्त-कफ के लिए योग, मोटापे के लिए, स्पाइनल कोर्ड एंड स्ट्रक्चरल बैलेंस, थायराइड, हाइपोथाइराइड, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, लीवर रोग, किडनी रोग, स्पलिन रोग, पेनक्रियाज़ व इंटस्टाइन रोग, कोंस्टिपेशन, अपच, एसिडिटी, प्रोस्टेट, हर्निया, हाइड्राेसिल, वायु रोग, पाइल्स, फिशर, फिस्टुला आदि रोगों के लिए योगासन बताए।
सुबह समय से पहले ही फुल हुआ स्टेडियम
प्रात: 6 बजे से पहले ही पूरा स्टेडियम योग साधकों से भर गया था। इसके लिए पूज्य स्वामी जी ने आंध्र प्रदेश की योगी आत्माओं के जोश, जुनून, उत्साह व अनुशासन की प्रशंसा करते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि योग व सनातन धर्म के प्रति आंध्र प्रदेश की जनता में श्रद्धा भाव है।
प्राण ही ब्रह्मविद्या है
योगासन के अलावा स्वामी जी ने प्राणायाम का भी अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि प्राण विद्या पूर्ण वैज्ञानिक, अत्यंत प्रभावशाली व बिल्कुल सरल है। इसे प्रत्येक आयु वर्ग वाला व्यक्ति आसानी से कर सकता है। स्वामी जी ने प्राणायाम को ब्रह्मविद्या बताया। यह नैनो व पिको मेडिसिन का कार्य करता है। उन्होंने भस्त्रिका, कपालभाति, बाह्य प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी, उद्गीथ, शीतली, शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास कराया।
कौन-कौन रहे उपस्थित
इस अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; केंद्रीय राज्य मंत्री भारी उद्योग श्री भूपति राजू श्रीवास वर्मा; आंध्र प्रदेश सरकार में मानव संसाधन विकास (HRD), सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार मंत्री श्री नारा लोकेश; स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सत्य कुमार यादव; पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा मंत्री श्री कंदुला दुर्गेश; विजयवाड़ा के सांसद श्री केसिनेनी श्रीनिवास (नानी); विजयवाड़ा सेंट्रल के विधायक श्री बोंडा उमामहेश्वर राव आदि प्रमुख राजनीतिज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पतंजलि योग समिति की मुख्य महिला केंद्रीय प्रभारी डॉ. साध्वी देवप्रिया, मुख्य केंद्रीय प्रभारी भाई राकेश ‘भारत’ व स्वामी परमार्थदेव, प्रवक्ता पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज- श्री एस.के. तिजारावाला तथा आस्था चैनल के सीईओ श्री प्रमोद जाेशी की मुख्य भूमिका रही।

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